>अहांक संग बिताएल दिनकतेक छोट होएत छलतखन ई दुनियाकतेक नीक लागैत छल.ओ आमक…लतामक गाछीआ गेहुंक…मटरक लहराइत खेतजतय बितय छलअपन प्यारक स्वर्णिम क्षण.अहांक रुसिकयकुसियारक खेत में छुपि जनायआ हमर बेचैनी स अहांके खोजनाय.मिलला पर ज़ोर स हंसि कs भगनायदम फुललाs पर दुनु गोटा केकन्हा पर हाथ धs हाफनायअहांके भरिs पांज चिपैट क नचनायआ…एहिठाम बस मे लोकक चिपटनायकतेक फर्क अछि…हम एतय आबि त गेलहुंमुदा हमर मन… हमर हंसिहमर सभ किछुओतय रहि...
> गप भेलाह के बाद बाबूजी त किछ शांत भेलाह मुदा मां के बेचैनी कम नहि भेलन्हि. मां बेर-बेर बाबूजी के कहैत रहलीह जे...