Katha-Pihani

Katha-Pihani, Kavita, kahani

>विवश

>विवश

>मैनेआज भीदेखा हैतुम्हारी आंखोंमेंप्यार का सागर…जोदिल की बातेंकहने कोव्याकुल रहने परभीखामोश थींना जानेक्याकारण हैजोतुम्हेंविवश कर देताहैकुछ बोलने सेतुमइसे कैसेसह सकोगी

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>आंसू

>आंसू

>अभीतुम गर्व सेहंसकर कहती होसभीतुम्हें देखकरजीते हैंगाते हैंऔरमुस्कुराते हैंपरमैं चाहता हूंकितुम मुझे देख करजीओगाओऔरमुस्कुराओऔरअगर तुम्हारेचेहरे परमुझेये न दिखातोमैंतुम्हेदेखते हुएमरकरदिखा दूंगातब तुमअपनी भूल केकारणमेरी चितापरआंसू बहाओगी

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>घायल

>घायल

>वहचंचल लड़कीमुस्कुराते हुएमेरे पासआती…अपनेनयनों के बाण सेघायल कर…मुझे विचलित करचली जातीऔर मैंतब तकतड़पताजब तककिवह फिर आकरमेरेजख्मी दिल परअपने प्यार कीमरहमन लगा देती

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>इजाजत

>इजाजत

>मैं तोचाहता था किगुलाब की उसकोमल कली कोसीने सेलगाकरपूरा खिला दूंपूर्णता काएहसासकरा दूंपूनम काचांदबना दूंपर मुझे क्यामालूम था किमाली मुझेइसकीइजाजत न देगाऔरवो मेरे सीने सेन लग पाने केगम मेंबिना खिले हीदम तोड़ देगी

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>दिन-रात

>दिन-रात

>दिनमेरे जीवन कोउजाले सेभर देतामैं उसकोदूर से हीजीभरके देखा करतासपने बुनतागाने गाताहंसतामुस्कुरातापररातमेरे जीवन में भीअंधेराला देतीऔरमैं उनकोदेखने के लिएसुबहकी प्रतिक्षा मेंरात भरकरवटेंबदलता रहता

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>प्यार

>प्यार

>क्याप्यार केवलवही करते हैंजो प्रेमिका केन मिलने परसारी दुनिया कोआग लगाने कीबात करते हैंयाहम भीकरते हैंजोउनके नामिलने परसीने मेंआग का दरियालिएजिये जाते हैं

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>किसी के साथ

>किसी के साथ

>क्या मैं अकेला हूंनहींतो फिर साथ कौन है ?वेजो मेरे पड़ोसी हैंया वेजो मुझेपेड़ पर चढ़ाखुद नीचेजड़ काट देते हैंया वे तो नहींजोये जानने के लिएअपनी सारी फौजहमारी कुटिया के पासइसलिएलगा रखी है किकहीं मैंकिसी के साथतो नहीं हूं…

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>अहांक संग

>अहांक संग

>अहांक संग बिताएल दिनकतेक छोट होएत छलतखन ई दुनियाकतेक नीक लागैत छल.ओ आमक…लतामक गाछीआ गेहुंक…मटरक लहराइत खेतजतय बितय छलअपन प्यारक स्वर्णिम क्षण.अहांक रुसिकयकुसियारक खेत में छुपि जनायआ हमर बेचैनी स अहांके खोजनाय.मिलला पर ज़ोर स हंसि कs भगनायदम फुललाs पर दुनु गोटा केकन्हा पर हाथ धs हाफनायअहांके भरिs पांज चिपैट क नचनायआ…एहिठाम बस मे लोकक चिपटनायकतेक फर्क अछि…हम एतय आबि त गेलहुंमुदा हमर मन… हमर हंसिहमर सभ किछुओतय रहि...

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