>मिथिलांचलक लोकपर्व सामा-चकेबा

>मिथिलांचलक लोकपर्व सामा-चकेबा

>सामा-चकेबा मिथिलांचलक एकटा खास लोक पर्व अछि. ई सिर्फ मिथिलांचले टा में मनायल जाइत अछि. ई मिथिलाक लोक संस्कृति सं जुड़ल त अछिए..एकर पौराणिक मान्यता सेहो अछि. कहल जाइत अछि जे सामा भगवान श्रीकृष्ण के पुत्री श्यामा छलिह जे अपन पिताक श्राप के कारणे चिड़िया बनि गेलिह. एकर जिक्र विष्णु पुराण में सेहो मिलैत अछि. सामा चकेबा असल में भाई बहिनक प्रेमक पावनि अछि. अहि में सामा चकेवा… सतभइया…...

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>सामा-चकेबा शुरू

>सामा-चकेबा शुरू

>छठ खत्म होयतहिं अपन मिथिलांचल में भाई बहिनक प्रेमक…स्नेहक पावनि सामा चकेबा शुरू भय जाय छै. जखन छोट छलहुं त गाम घर में दीदी…बुआ सभ के सामा चकेबा खेलैत देखय छलह…आओर हमहुं सभ ओहि में किछ न किछ करैत रहय छलहुं…बच्चा में ई सभ करय में बड़ मन लगय छै…नहिं किछ तं चुगला के जराबय के काज त होयते छल…आओर आखिरी दिन खाई लेल सेहो प्रसाद सभ मिलय छल....

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>छठक तैयारी

>छठक तैयारी

>मिथिलाक सभस महत्वपूर्ण पावनि अछि छठ…आओर अखन गाम-घर, शहर सभठाम छठक तैयारी जोर शोर सं चलि रहल अछि…छठ में भगवान सूर्य के पूजा होइछन्हि…छठ पावनि हर साल दिवाली के बाद कातिक महीना के छठा दिन होइछ…कहि सकय छी जे कातिक मास के इजोरिया में षष्ठी तिथि के छठ पावनि शुरू होइ छै…कहल जाइछै जे भगवान दिनकर के पूजा…आराधना मात्र सं सभ मनोकामना पूरा होइ छै…तीनों लोक में शक्ति के...

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>अन्नकूट, पखेब,भाईदूज आओर चित्रगुप्त पूजा

>अन्नकूट, पखेब,भाईदूज आओर चित्रगुप्त पूजा

> दीपावली देखल जाय त एक दिनक पावनि नहिं अछि…ई पांच दिनक पावनि अछि जे धनतेरस सं शुरू भ भाईदूज के खत्म होयत अछि…ई कातिक अन्हरिया के त्रयोदशी सं शुरू भय इजोरिया के द्वितीया तक पंच महोत्सव के रूप में मनाबय जाइत अछि…त्रयोदशी के धनतेरस, चतुर्दशी के नरक चतुर्दशी या छोटका दिवाली, अमावस्या के दिवाली, प्रतिपदा के अन्नकूट या गोवर्धन पूजा या पखेब…आओर द्वितीया के भाईदूज आओर चित्रगुप्त पूजा.धनतेरस...

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>दीपावली आओर हुक्का-लोली

>दीपावली आओर हुक्का-लोली

> ऑर्कुट पर एकटा संगी छथिन्ह अल्का रंजन…अपन मिथिलांचल सं छथिन्ह…दीपावली सं एक दिन पहिने हुनकर स्क्रैप आयल जे सर मटिया तेल में हुक्का-लोली भिजौने छी कि नै?? सत्य कहल जाय त हम हुक्का लोली के अहि ठाम अयला पर एकदमे सं बिसरि गेल छलहुं..अल्काजी के स्क्रैप अयला पर मन गदगद भ गेल…मन भेल जे भरि पांज भरि क चुमि लिअ…मुदा एकटा तं ऑर्कुट छोड़ि कोनो जान पहचान नहिं..दोसर...

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>गामक कोजागरा

>गामक कोजागरा

> गाम घर सं बाहर रहला पर कतेक चीज पाछा छुटि जाइत अछि… एकरा अहां एहि बात सं बुझि सकय छी जे आई कोजगरा अई आ दिल्ली में रहला के कारण हमरा ध्यान पर नहिं छल…सांझ में जखन गाम फोन कयलौंह त मां कहलथिन्ह जे भैया पूजा के तैयारी में जुटल छथिन्ह…आई कोजागरा छै न ! …अहां पान मखान खा लेब…हम कहलन्हि हमरा ध्याने पर नहिं छल. गाम-घर पर...

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>नवरात्रि

>नवरात्रि

> आई सं देश भर में नौ दिन तक मनायल जाइ वाला शारदीय नवरात्र के शुरूआत भ गेल… शुरूआत जलयात्रा आ कलश स्थापन के साथ भेल…पितृपक्ष के बाद नौ दिन देवी के नौ स्वरुपक पूजा कएल जाइत अछि…प्रथम शैलपुत्री, द्वितीय नवरात्र ब्रह्मचारिणी देवी, तृतीय नवरात्र चंद्रघंटा, चतुर्थ नवरात्र देवी कुष्मांडा, पंचम स्कंदमाता, षष्ठ नवरात्र कात्यायनी, सप्तम नवरात्र कालरात्रि, अष्टम नवरात्र महागौरी आओर नवम नवरात्र में भगवती के सिद्धियात्री रूपक...

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>जीतिया पावनि

>जीतिया पावनि

>मिथिलांचल में पावनि केर कोनो कमी नहिं अछि…मधुश्रावणी, बरसाइत, सामा चकेवा , चौरचन, कोजगरा, जूड़िशीतल ऐहन कतेक पावनि अई…मुदा गाम घर सं बाहर रहला पर कई बेर पता नहिं चलय छै…एहने में एकटा पावनि जितिया पिछला हफ्ता मिथिलांचल में मनाओल गेल…धार्मिक आस्थाक संगहि संग प्रकृति आओर सामाजिक रूप सं अहि पावनि केर खास महत्व अई…एहि पावनि में माय सभ अपन पुत्र…संतान के दीर्घजीवी होबय के कामना करैय छथिन्ह…एहि पावनि...

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>ऑर्कुट-मैं हूं ना

>ऑर्कुट-मैं हूं ना

>आई काल्हिक भागि-दौड़ केर दुनिया में हम सभ नहिं तं ककरो अपन दिलक बात कहि पावय छी आ नहिं सुनि पावय छी…बस काज…काज आओर काज…एहि में हमर सभक दुनिया सिमटि कय रहि गेल अछि…ऑफिस सं घर आ घर सं ऑफिस…दोसर कोनो काज नहिं…आओर काज स बढय अ टेंशन…ऑफिस में काजक टेंशन…पढ़ाई के टेंशन…तं एक्जामक टेंशन…नौकरीक टेंशन…बॉस स झिक-झिक… गर्लफ्रेंड स अनबन…मनमुटाव…टेंशने…टेंशन… एहि में हम चाहैत छि जे कोई एहन...

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>मधुश्रावणी

>मधुश्रावणी

> आई प्रेस क्लब स बाहर निकलैत समय पवनजी मिल गेलाह…पुछलएन्हि कि औ बड़ दिन बाद दर्शन देलहुं…त कहलाह गाम गेल छलहुं मधुश्रावनी पर…पानि के कारण बाढ़ि में गामे पर फंसि गेलहुं एहि कारणे आबय में देर भ गेल…मधुश्रावणी के बात आबतहि मन भेल जे एकरा बारे में अहां सभ बात कएल जाय… मधुश्रावणी केर अपन मिथिला में विशेष स्थान अई…ई नवविवाहिता स्त्रीक पावनि अछि…नवकनिया सभ अपन पतिक दीर्घायु...

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>इंद्र पूजा

>इंद्र पूजा

> उत्तर बिहार या ई कहियौ मिथिलांचल में लगातार कई दिन सं भ रहल बारिश स इंद्र पूजा में ओतेक रमन चमन नहिं रहल…ओना इंद्र पूजा सभ ठाम होबो नई करय अ…दरभंगा, राजनगर आ मधुबनी में ई पूजा खूब धूमधाम सं मनायल जाइत अछि…ई तीनु जगह में मधुबनी में रमन चमन किछु ज्यादा रहय छै…दरभंगा में तS इंद्र भवन में पूजा होइत अछि आओर इंद्र मैदान में मेला लगैत...

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>यादों का दर्पण

>यादों का दर्पण

>मुझसे तुम क्या दूर गईयादों का दर्पण छोड़ गई… दिल बहलता जिससे मेरासाथ जो मुझको मिलता तेरापर तुम तो मुझसे रुठकरऐसे क्यूं नाता तोड़ गई… मुझसे… इसमें जब तेरा चेहरा दिखतातब मैं खोया-खोया रहतापर तुम तो सदा के लिए मेरातन्हाई से रिश्ता जोड़ गई… मुझसे… क्या-क्या नहीं सपने सजाये?फूलों के शहर में महल बनायेपर दिल ही नहीं तुम तोमेरा ताजमहल भी तोड़ गई… मुझसे… सबने ही ठुकराया मुझकोतुमतो कहती...

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>विवश

>विवश

>मैनेआज भीदेखा हैतुम्हारी आंखोंमेंप्यार का सागर…जोदिल की बातेंकहने कोव्याकुल रहने परभीखामोश थींना जानेक्याकारण हैजोतुम्हेंविवश कर देताहैकुछ बोलने सेतुमइसे कैसेसह सकोगी

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>आंसू

>आंसू

>अभीतुम गर्व सेहंसकर कहती होसभीतुम्हें देखकरजीते हैंगाते हैंऔरमुस्कुराते हैंपरमैं चाहता हूंकितुम मुझे देख करजीओगाओऔरमुस्कुराओऔरअगर तुम्हारेचेहरे परमुझेये न दिखातोमैंतुम्हेदेखते हुएमरकरदिखा दूंगातब तुमअपनी भूल केकारणमेरी चितापरआंसू बहाओगी

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>घायल

>घायल

>वहचंचल लड़कीमुस्कुराते हुएमेरे पासआती…अपनेनयनों के बाण सेघायल कर…मुझे विचलित करचली जातीऔर मैंतब तकतड़पताजब तककिवह फिर आकरमेरेजख्मी दिल परअपने प्यार कीमरहमन लगा देती

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>इजाजत

>इजाजत

>मैं तोचाहता था किगुलाब की उसकोमल कली कोसीने सेलगाकरपूरा खिला दूंपूर्णता काएहसासकरा दूंपूनम काचांदबना दूंपर मुझे क्यामालूम था किमाली मुझेइसकीइजाजत न देगाऔरवो मेरे सीने सेन लग पाने केगम मेंबिना खिले हीदम तोड़ देगी

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>दिन-रात

>दिन-रात

>दिनमेरे जीवन कोउजाले सेभर देतामैं उसकोदूर से हीजीभरके देखा करतासपने बुनतागाने गाताहंसतामुस्कुरातापररातमेरे जीवन में भीअंधेराला देतीऔरमैं उनकोदेखने के लिएसुबहकी प्रतिक्षा मेंरात भरकरवटेंबदलता रहता

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>प्यार

>प्यार

>क्याप्यार केवलवही करते हैंजो प्रेमिका केन मिलने परसारी दुनिया कोआग लगाने कीबात करते हैंयाहम भीकरते हैंजोउनके नामिलने परसीने मेंआग का दरियालिएजिये जाते हैं

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>किसी के साथ

>किसी के साथ

>क्या मैं अकेला हूंनहींतो फिर साथ कौन है ?वेजो मेरे पड़ोसी हैंया वेजो मुझेपेड़ पर चढ़ाखुद नीचेजड़ काट देते हैंया वे तो नहींजोये जानने के लिएअपनी सारी फौजहमारी कुटिया के पासइसलिएलगा रखी है किकहीं मैंकिसी के साथतो नहीं हूं…

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>अहांक संग

>अहांक संग

>अहांक संग बिताएल दिनकतेक छोट होएत छलतखन ई दुनियाकतेक नीक लागैत छल.ओ आमक…लतामक गाछीआ गेहुंक…मटरक लहराइत खेतजतय बितय छलअपन प्यारक स्वर्णिम क्षण.अहांक रुसिकयकुसियारक खेत में छुपि जनायआ हमर बेचैनी स अहांके खोजनाय.मिलला पर ज़ोर स हंसि कs भगनायदम फुललाs पर दुनु गोटा केकन्हा पर हाथ धs हाफनायअहांके भरिs पांज चिपैट क नचनायआ…एहिठाम बस मे लोकक चिपटनायकतेक फर्क अछि…हम एतय आबि त गेलहुंमुदा हमर मन… हमर हंसिहमर सभ किछुओतय रहि...

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